Projector –

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Projector

आज हम आपको बताने वाले है प्रोजेक्टर के बारे में की ये क्या होता है और यह कैसे काम करता है ? इसका प्रयोग हम कहा करते है और यह कीतने प्रकार का होते है |तो चलिए शुरू करते है |

Projector क्या होता है ?—

जैसे जैसे सिनेमा का प्रचलन बढ़ता गया हमारे दुनिया में लोगो को घर में सिनेमा चाहिए था | क्योकि काफी लोगो का experience बहुत अच्छा होता था तो कुछ लोगो का experience बहुत खराब होता था | काफी लोगो को चाहिए था की हम शांति से अकले में देखना चाहता हु | काफी लोगो बहुत प्रॉब्लम होता था की कुछ लोग बहुत सिटी बजाते है | तो धीरे धीरे technology इतनी आगे आ गयी प्रोजेक्टर सस्ते होने लगे तो , करोड़पति लोग अपने घरो में प्रोजेक्टर लगाने लगे |तो ऐसे करके इसका चलन बढा| और इसका फ़ायदा यह हुआ की घर में काफी bright चमकीला , काफी बड़ा यानी की 100 इंच के साईज से ज्यादा बड़ा display लोगो के घरो में आने लगे | और यह बात समझ लीजिए की 100 इंच इतना बड़ा होता है की एका दुक्का टीवी भी नही आता है उस साइज का |मतलब प्रोजेक्टर तब से आने लगा जब CRT , मोनिटर भी नही आते थे |

प्रोजेक्टर को किसने बनाया ?–         

प्रोजेक्टर का आविष्कार Charles Francis Jenkins ने सन 1894 में किया था |

Projector कैसे कार्य करता है ?–          

Power full light —

इसका पहला सोर्से powerful light होता है |इसके लिए बेसिकली हैलोजन का इस्तेमाल किया जाता है तो कभी जिनान का इस्तेमाल किया जाता है |हर जगह पर अलग अलग सिस्टम इस्तेमाल करते है |और यह बहुत बिजली खाता है|मतलब प्रोजेक्टर का main पावर कन्ज्ब्शन आप देखिये तो यह लाईट ही खाता है |

LED अपना अब generally उतना successful नही रहा क्योकि LED का मतलब पहले तो वह बहुत महँगा हो जाता , दूसरा LED को constant current , constant voltage और cooling चाहिए होती है | LED मैच्योर हो ही रहा था था की तभी लेजर आकर हटा दिया दिया इसे मार्केट से | तो LED इतना नही चला |

Brightness Control —

आपको लैट सोर्स चाहिए ये पहला होता है , दूसरा अब लाईट को आप कैसे कंट्रोल करते है , मान लीजिए आपके पास सफेद लाईट सोर्स है तो उसमे आपको क्या करना है उसमे आपको ब्रिटनेस को कंट्रोल करना है |आप जैसे कोई भी इमेज को देखते है तो उसमे पैनल्स होते है RGB(रेड ग्रीन ब्लू ) , और उसमें तो रेड और ग्रीन जो है ओसे कंटोल करने के लिए कितना दिखाए कितना नही तो उसे कंटोल करने के लिए ब्रिटनेस को adjust किया जाता है |

Color control–        

आप जो ये RGB बोल रहे है तो ऐसा थोड़ी न है की r का मतलब हो गया की पूरा स्क्रीन रेड क्र दो या g का मतलब हो गया पूरा स्क्रीन ग्रीन कर दो |उसमे डिजाईन दिखाए जाते है |तो ये दो फैक्टर होते है जिन्हें आपको कंट्रोल करना है एक रंग और दुसरा ब्रिटनेस को कंट्रोल करना होता है | और दो फैक्र्टर हर पिक्सल पर किया जाता है |आपका जो भी मानिटर है उसमे भी ये दो पिक्सल है इसमे एक सिस्टम यह डीसाईट करता है कौन सा रंग दिखाना है और एक सिस्टम यह डीसाईट करता है की कितना लाईट देना है |पूरा डिजिटल इमेज की दुनिया इसी दो चीज पर चलती है |की कितना लाईट दिखाए और कौन सा कलर दिखाए |और यह सब बहुत तेज़ी से होना चाहिए |

जैसे आप मान लीजिए आप स्लाइड प्रोजेक्टर जो पहले आते थे उसमे बहुत समय लगता था |

प्रोजेक्टर कितने प्रकार के होते है?—

DLP projector क्या होता है –

DLP projector एक आप्टिकल सेमिकंडक्टर पर based है |इसे सन 1987 में Texas Instruments ने बनाया था |DMD चिप कई मिलियन tiny  मिरर से बने हुए होते है |जो कीrotate करते हुए 10 degree angle में बेहतर models मेंये 12 degree भी देते है |

DLP इसका पूरा नाम digital light processing है | यह एक चिप बेस टेक्नोलॉजी है |जिसे टेक्स्सिस इंस्ट्रूमेंट व्दारा तैयार किया जाता है |जो स्पिन कलर की व्हील और माइक्रोस्कोपिक मिरर से को एकत्रित करती है अपने इमेज को फ़ार्म करने के लिए |जो देखने नेचुरल और सेचुरेशन से भरपूर होती है | dlp PROJECTOR लेने का एक फायदा यह भी है की आपको फिल्टर की जरूरत नही होगी |और धुल के बारे में चिंता करने की भी जरूरत नही है |क्रोकी एनका सील्ड डिजाइन धुल के जमाव को कम और धीमा करता है |इससे आपकी प्रोजेक्टर की मेंटेंस की लागत कम हो जाती है | ultrafast DLP chip और small design file  का उपयोग करते हुए DLP projector smooth और jetalfree images प्रोजेक्ट करने में सक्षम है |

DLP color wheel की वजह से rainbow effect दिखाई से सकता है |प्रोजेक्टेड इमेज पर दिखाई से सकता है जो movie watching experience पर असर कर  सकता है |

DPL projector users को ज्यादा loments वाले प्रोजेक्टर का चुनाव करना आवश्यक हो जाता है |उन जगह के लिए जहा लाईट का प्रोयोग जरुरी है प्रोजेक्शन के लिए |साथ ही इसके spin color wheel चलते वक्त ज्यादा आवाज करते है |वो कुछ सिनेमा प्रेमिओ को परेशान कर सकते है |यह बहुत महंगे होते है पर इनकी तुलना में LCD बहुत सस्ते होते है |

LCD projector क्या होता है –

LCD projector high intensity  light beam पर काम करते है| जो तिन एलसीडी से पास होती है |यही कारण है की lcd प्रोजेक्टर तो थ्री LDC projector कहा जाता है |जैसे ही प्रकाश की किरण एन तीन LCD से होकर गुजरती है वो तीन भाग में विभाजित हो जाती है |और finally एक  prizemen  में एक इंच के तौर पर combine होती है जिससे आपको एक शानदार क्लियर इमेज दिखाई देती है |यह प्रोजेक्टर सिनेमा प्रेमिओ के लिए आदर्श माहौल बनाता है |और इनकी कीमत DLP projector की तुलना में कम होती है |और साथ ही ये rainbow effect नही देते है |और इनके इस्तेमाल में बिजली की खपत भी कम होती है |

LED projector क्या होते है ?-–        

LED projector को display technology व्दारा उपयोग में नही लाया जा सकता |बल्कि लाईट व्दारा इस्तेमाल किया किया जाता  है | सॉलिड स्टेट इलुनेशन तकनिक वाले कुछ DLP प्रोजेक्टर वास्तव में LED प्रोजेक्टर है | एक और प्रकार का प्रोजेक्टरो पिको प्रोजेक्टरो आमतौर पर Led तकनीक का भी उपयोग करता है |पिको प्रोजेक्टर अनिवार्य रूप से handless device है जो LCOS या silicon पर liquid crystal का उपयोग करते है |जो एक लेड पैनल के सामान है लेकिन त्रान्मिसिव के बजाय रिफ्लेक्टिव है |इन मामलो में, प्रोजेक्टर परंपरागत लाप को लम्बे समय तक चलने वाले और अदीक कुशल लाल , हरे , नीले LED रंग में दिखाई देता है |

Conclusion–      

आज हमने आपको बतया की प्रोजेक्टर क्या होता है | उम्मीद करते है आपको हमारा आज का यह लेख पसंद आया होगा | अगर आपको इसमे कोई भी गलती नजर आती है तो Comment करके हमें बता सकते है | हम उस गलती को दूर करने की पुरी कोशिश करेंगे |


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