कंप्यूटर सिक्यूरिटी – (Computer Security)

Spread the love

Contents

                               COMPUTER SECURITIES

Computer आज के समय में हम सभी के लिए बहुत ही जरुरी है और computer की सुरक्षा करना हमारी जिम्मेदारी है| computer हमारे जीवन में एक बहुत बड़ी भूमिका निभाता है| Computer सभी कामो को बहुत ही आसानी से गोपनीय तरीके से करता है computer सभी कामो को बहुत ही तेजी से करता है| इसलिए हमसभी अपने computer को सुरक्षित रख सके ताकि कोई भी अवैध users आपके computer का गलत इस्तेमाल न कर सके|

Example के लिए हम आपको बताते है की जैसे की कोई एक company को आप फिक्स कर लेते है उस company के सभी जरुरी सूचनाओ को जैसे- किसी कस्टमर का डाटा, company के क्रेडिट रिकॉर्ड, कर्मचारी का रिकॉर्ड इन सभी सूचनाओ को गोपनीय और सुरक्षित रखना चाहिए| तो आइये जानते है की computer securities क्या है|

कंप्यूटर सिक्योरिटी (Computer securities)-

कोई भी कम या क्रिया जो आपके computer के hardware और software data से प्राप्त की गयी सूचनाओ को नुकसानी हो सकती है computer securities को रिस्क के नाम से जाना जाता है| 

कंप्यूटर की कभी भी चुक हो सकती है computer की दुनिया में कोई भी असंवैधानिक काम हो उसको computer crime कहते है| ऑनलाइन या इन्टरनेट के जरिये जो भी असंवैधानिक कार्य होता है उसको साइबर क्राइम कहते है|

कंप्यूटर सिक्योरिटी को साइबर सिक्योरिटी या आई टी सिक्योरिटी के नाम से भी जाना जाता है| यह सूचना के आदान प्रदान के लिए एक शाखा है जिसको खासकर computer की सुरक्षा के लिए बनाना गया है| इसके द्वारा डाटा computer system में स्टोर होती है जिसके द्वारा यह डाटा को access करती है और इसके द्वारा डाटा की सुरक्षा की जाती है| computer को सुरक्षा प्रदान करने के चार तरीके होते होते है| तो आइये जानते है computer को सुरक्षा प्रदान करने के लिए चार तरीके कौन – कौन से है|

1. सिस्टम एक्सेस कंट्रोल (System access control)

2. सिस्टम और सिक्योरिटी प्रशासन (System and security Administration)

3. सिस्टम डिजाईन (System Design)

4. डाटा एक्सेस कंट्रोल (Data access control) 

सिस्टम एक्सेस कंट्रोल (System access control)-

सिस्टम एक्सेस कंट्रोल एक ऐसी प्रणाली है जो किसी भी computer में किसी भी data या इनफार्मेशन का उपयोग कर उस डाटा में आप बदलाव करने के लिए आप System access control का इस्तेमाल कर सकते है| जब आमतौर पर कोई यूजर एक computer में लॉग इन करता है जिसके बाद access control यह बताता है की कौन सा डाटा पहचान में होना चाहिए और कौन सा डाटा नही ये सभी काम सिस्टम access control के द्वारा किया जाता है| 

सिस्टम और सिक्योरिटी प्रशासन –

यह एक ऐसी computer security है जिसमे हम ऑफ लाइन काम को करने के लिए बनाया गया है इस प्रक्रिया में हम या तो अपने computer system को सुरक्षित रख सकते है या फिर computer की सुरक्षा को तोड़ दिया जाता है उसे system and security administration कहते है|

सिस्टम डिजाईन (System design)-

सिस्टम डिजाईन को computer में इस तरह से डिजाईन किया गया होता है जो computer के हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर की बेसिक सुरक्षा का लाभ लेती है तो यह काम सिस्टम डिजाईन में किया जाता है|

डाटा एक्सेस कंट्रोल (Data access control)-

डाटा एक्सेस कंट्रोल आपके computer system में सबसे सही तरीके से काम करता है| यह इस बात का पता लगता है की कौन सा डाटा कौन नियंत्रित कर रहा है इस बात का पता कंट्रोल access के द्वारा किया जाता है| computer system किसी भी व्यक्ति विशेष या फाइल या डाटा और बहुत से ऑब्जेक्ट की सुरक्षा के नियमो पर आधारित रहता है तथा यह access नियमो को बताता है| यह सभी काम Data access control में होता है|

कंप्यूटर वायरस (Computer Virus)-

कंप्यूटर वायरस एक प्रोग्राम होता है जो हमारे computer को नुकसान पहुचाता है जिसके द्वारा हमारे computer पर निगेटिव प्रभाव पड़ता है| जिसके द्वारा हमे अपने computer में काम करने में बहुत सारी प्राब्लम आती है| विशेष रूप से computer एक वायरस प्रोग्राम है जो हमारे computer में अपने आप ही आ जाता है यदि एक बार आपके computer में कोई वायरस आ जाता है तो आपकी फाइल या Operating system ख़राब हो सकती है नेटवर्क के विस्तार से ही ईमेल और इन्टरनेट के द्वारा computer virus तेजी से फ़ैल रहा है इन सभी  तकनीको के द्वारा यूजर फाइल और किसी भी वायरस को एक दुसरे में फैला सकते है|

वायरस हमारे computer में तिन तरीको से activate होता है-

1. वायरस वाली फाइल को खोलने से |

2. वायरस वाली प्रोग्राम को चलाने से |

3. डिस्क ड्राइव में वायरस वाली फ्लॉपी को डालकर computer को स्टार्ट करने से |  

ईमेल अटैचमेंट वायरस(E- Mail Attachment Virus)-

आपके computer में सबसे आसानी से e-mail के द्वारा सबसे जादा वायरस आने का खतरा होता है या e-mail से जुडी फाइल से भी आपके computer में वायरस आ जाते है| किसी भी e-mail attachment को open करने से पहले आप यह सुनिश्चित कर लीजिए की e-mail भेजने वाला भरोसेमंद है या नही| 

ट्रस्टेड सोर्स(Trusted source)-

Trusted source एक विश्वसनीय company या व्यक्ति होता है जिसके बारे में हम बिल्कुल निश्चिन्त होते है की वह व्यक्ति या company हमे कोई भी वायरस वाली फाइल को नही भेजेगा| किसी भी अनजान जगह से आये हुए e-mail को आपको बिना open किये ही उस mail को हमे डिलीट कर देना चाहिए ये सभी काम करके आप अपने computer को वायरस से बचा सकते है|

वायरस प्रोग्रामर(Virus Programmer)

आपके मन में हमेशा एक सवाल रहता होगा की वायरस आपके computer में कैसे आ जाते है वायरस को किसी व्यक्ति ने बनाया है या वायरस किसी computer द्वारा अचानक से बनाये गये होते है| तो आइये आज हम आपको बताते है की वायरस कैसे बनाया गया और क्यू बनाया गया|

वायरस किसी भी computer द्वारा अचानक नही तैयार किये जाते है बल्कि वायरस किसी व्यक्ति द्वारा जानबूझ कर सोच समझ कर बनाया गया एक प्रोग्राम है तथा जो भी व्यक्ति वायरस प्रोग्राम को बनाते है उनको “Virus Authar” कहा जाता है| Virus Authar वायरस को तलासना एक चुनौती के रूप में लेते है और वायरस प्रोग्राम को लोगो को परेशान करने के लिए तैयार करते है| वायरस को तैयार करने के लिए सबसे पहले आपको programming की जानकारी होनी चाहिए|

कुछ वायरस ऐसे भी होते है जिससे हमारे computer को कोई नुकसान नही होता है यह हमारे computer को स्थायी रूप से बंद कर देते है और आपको कुछ संदेश ध्वनि देते है|

Example- म्यूजिक बग वायरस आपके computer को कुछ अजीब ध्वनी बजाने का संदेश देते है और दुसरे वायरस हमारी हार्ड डिस्क में जो भी डाटा स्टोर रहती है उस डाटा को नष्ट कर देती है| अगर आपका computer सही से कार्य नही कर रहा है तो आप समझ जाइये की आपके computer में वायरस आ गया है| 

आज के समय में वायरस हमारे computer के लिए एक गंभीर चुनौती बनती जा रही है रोजाना तक़रीबन छ: नये वायरस के साथ लाखो करोड़ो वायरस computer की दुनिया में मौजूद है|

वायरस के प्रकार(Types of Virus)-

बहुत सारे webside वायरस की लिस्ट को जानने के लिए अपने पास रखती है और उनको प्रदर्शित करती है| वायरस तिन प्रकार के होते है|

बूट सेक्टर (Boot Sector)-

बूट सेक्टर वायरस को सिस्टम वायरस के नाम से भी जाना जाता है| यह वायरस तब आपकी computer में आता है जब आप फ्लॉपी ड्राइव के मास्टर ड्राइव से अपने computer को बूट करते है तो यह ड्राइव “A” में मौजूद डिस्क के बूट सेक्टर में चला जाता है| फ़्लापी डिस्क के बूट सेक्टर से आपके computer की हार्ड डिस्क भी ख़राब हो सकती है|

फाइल वायरस(File Virus)-

फाइल वायरस को प्रोग्राम वायरस भी कहा जाता है फाइल वायरस को किसी भी प्रोग्राम फाइल में जोड़ा जाता है जब इन्फेक्टेड प्रोग्राम को रन करते है या आप उस प्रोग्राम पर काम करते है तो वायरस मेमोरी में लोड हो जाता है जादा से जादा यूजर फाइल वायरस को computer से किसी भी प्रोग्राम को डाउनलोड करने में या फिर किसी अनजान का ईमेल attachment open करने में यह वायरस हमारे computer में आ जाता है तथा यह बात उनको पता नही होती की इसमे वायरस है और वह हमारे computer में चला आता है| 

मैक्रो वायरस(Macro Virus)-

मैक्रो वायरस किसी भी एप्लीकेशन के मैक्रो लैंग्वेज का इस्तेमाल करता है| जैसे- की वर्ड प्रोसेसिंग और वर्कशीट| जब आप किसी भी डॉक्यूमेंट को open करते है जो संक्रमित मैक्रो वायरस होते है वह वायरस की मेमोरी में चले जाते है मैक्रो वायरस को तैयार करने वाले इसलो हमेशा टेम्पलेट में छिपा कर रखते है इसलिए वायरस उस डॉक्यूमेंट को प्रभावित कर देता है जो टेम्पलेट का इस्तेमाल करते है| ज्यादातर वायरस तब activate होते है जब आप किसी वायरस वाले प्रोग्राम को रन कराते है|  

लॉजिक बम या टाइम बम- 

लॉजिक बम एक वायरस होता है लॉजिक बम एक अलग तरह का वायरस है जो आपके computer में तब activate होता है जब आपका computer किसी विशेष कंडीशन में होता है| 

टाइम बम एक प्रकार का लॉजिक बम होता है जिसका डेट और time फिक्स किया गया होता है और वह और वह वायरस उसी time पर activate हो जाता है|

Malware Virus-

Malware वायरस को मैलीसियस लॉजिक प्रोग्राम वायरस कहते है malware वह वायरस होते है जो यूजर के जानकारी के बिना ही activate हो जाते है और computer को अपना काम करने में बाधा डालते है इस वायरस के साथ मिलकर दुसरे malware वायरस बहुत ही खतरनाक होते है| “वर्म” मैलिसियस लॉजिक अपने आप को तब तक हार्ड डिस्क की मेमोरी में कॉपी करके रखता है जब की मेमोरी पूरी तरह से ख़राब नही हो जाती| और मेमोरी काम करना बिल्कुल बंद कर देता है| और कुछ वर्म प्रोग्राम ऐसे होते है जो अपने आप को नेटवर्क के दुसरे computer में कॉपी करके रखते है|

ट्रोज़न हार्स

ट्रोज़न हार्स एक मैलिसियस लॉजिक प्रोग्राम है इस वायरस का नाम यूनानी धारणा के अनुसार ट्रोज़न हार्स नाम दिया गया यह एक ऐसा वायरस है जो अपने आपको छिपा कर रखता है| यह वायरस एक साफ सुथरे प्रोग्राम की तरह दिखाई देते है यह वायरस कार्य करने के निश्चित समय पर activate हो जाते है| 

गलत रूप से Computer का इस्तेमाल करना-

आपके computer का इस्तेमाल कुछ लोग गलत कामो को करने के लिए इस्तेमाल कर सकते है जो व्यक्ति computer network का इस्तेमाल गलत कामो के लिए करता है उसे “क्रैकर” कहा जाता है| और हैंकर भी नेटवर्क और computer internet का गलत इस्तेमाल करते है कुछ हैंकर computer को internet से ब्रेक करने की पूरी कोशिस करते है और बाकि हैंकर computer computer के जरुरी सूचनाओ को चुरा लेते है आपकी हार्ड डिस्क में स्टोर डाटा को नष्ट कर देते है| हैंकर computer को ब्रेक करने के लिए अपने आप को इन्टरनेट से connect करते है और यूजर के नाम से ही लॉग इन करते है| कुछ हैंकर हमारे computer को नुकसान नही पहुचाते है वह सिर्फ डाटा इनफार्मेशन को access करने का काम करते है| कुछ हैंकर कोई न कोई गलती कर जाते है और अपने होने का आपके computer में कोई न कोई इनफार्मेशन छोड़ जाते है जिससे यूजर पहचान जाता है की आपके computer में वायरस है या आपके computer को किसी ने ब्रेक करने की कोशिस की है| 

अनआथराइज्ड यूजर

बिना आपकी अनुमति के आपके computer का कोई गलत काम के लिए इस्तेमाल करता है तो उसे unauthorised user या अवैध इस्तेमाल कहते है| इसमे बहुत सारे काम होते है इसमे कोई भी का कर्मचारी company के  computer का इस्तेमाल कर अपने पर्सनल ईमेल को भेजने का काम करते है|

एक्सेस कंट्रोल(Access Control)-

Access control के इस्तेमाल से computer के हो रहे गलत इस्तेमाल को रोका जा सकता है और access control का इस्तेमाल करते समय कौन कौन से काम किये जा सकते है Software package two face का इस्तेमाल करके access control को अप्लाई करते है जिसको Identification  कहते है| यह इस बात को बताता है की आप एक सही यूजर है या नही| और Identification इस बात को बताता है की आप इस पर सही काम कर सकते है या नहीं| 

Identification और Authentication के चार प्रकार होते है-

User name and Password

User name और User ID अक्षरों का एक समूह होता है इसमे alphabates and Digit दोनों words हो सकते है यह सिर्फ एक यूजर को स्पेसिफाई करते है| Password user name के साथ इस्तेमाल किये जाने वाला एक गुप्त कोड होता है जो यूजर को computer को इस्तेमाल करने की अनुमति देता है|

बहुत सारे मल्टीयूज़र (Network) ऑपरेटिंग सिस्टम में computer में स्टोर डाटा या प्रोग्राम को इस्तेमाल करने से पहले यूजर name और डाटा को इंटर करने की जरुरत होती है| और सभी computer में ऐसा करना होता है|

पजेस्ड ऑब्जेक्ट(Pujesed Object)-

पजेस्ड ऑब्जेक्ट एक आइटम होता है जिसकी आपको computer के किसी सुविधा को इस्तेमाल करने के लिए जरुरत होती है| यह एक छोटा सा कार्ड की तरह होता है जिसको हम एटीएम(Automatic Taller Machine) की तरह इस्तेमाल कर सकते है पजेस्ड ऑब्जेक्ट होता है और यह आपको बैंक अकाउंट को operate करने की अनुमति देता है| पजेस्ड ऑब्जेक्ट को हमेशा Personal identification numbers के combinations के साथ इस्तेमाल किया जाता है|

पर्सनल आइडेंटिफिकेशन नंबर(Personal Identification Number)-

Personal identification number यह एक newmaric पासवर्ड है जो company या किसी व्यक्ति द्वारा इंटर किया जाता है| एटीएम को चार नंबर वाले पिन की जरुरत होती है| पिन एक पासवर्ड होता है और इसे किसी दुसरे पासवर्ड की तरह हमेशा संभाल कर रखना चाहिए| 

बायोमैट्रिक डिवाइस(Bio matric Device)-

हम अपने computer की सुरक्षा के लिए बायोमैट्रिक device का इस्तेमाल करते है| किसी भी सही या गलत व्यक्ति की पहचान बायोमैट्रिक डिवाइस से ही किया जाता है यह computer के इस्तेमाल से इस device क्र प्रोग्राम और सिस्टम को इस्तेमाल करने की अनुमति देता है| बायोमैट्रिक डिवाइस यह व्यावहारिक होते है|

जैसे – इसमे हाथ की बनावट, फिंगरप्रिंट, चेहरे की बनावट, आवाज इत्यादि|

कुछ ऐसी जरुरी सुचनाये होती है जो बायो मैट्रिक device द्वारा डिजिटल code में बदल दी जाती है और यह computer में स्टोर डिजिटल code से मिलान करती है और यदि computer में स्टोर डिजिटल code और आपकी निजी सूचनाओ से मैच नही हो पाती है तो computer process को करने से इंकार कर देता है| आज के समय में computer की सुरक्षा के लिए कई प्रकार के बायो मैट्रिक डिवाइस का इस्तेमाल किया जाता है|

जैसे – फेस रिकागनिशन सिस्टम, वॉयस वेरिफिकेशन, सिग्नेचर वेरिफिकेशन सिस्टम, कॉल बैक सिस्टम etc.

कूटलेखन (Cryptography)-

Cryptography में किसी भी सूचना को छिपाकर या गुप्त तरीके से लिखने की प्रक्रिया को कूटलेखन कहते है इसके माध्यम से डाटा आवागमन के दौरान डाटा को सुरक्षित रखा जा सकता है| इसके बहुत से component होते है| 

प्लेन टेक्स्ट (Plain Text)-

यह इनपुट के रूप में यूजर को बिल्कुल सही संदेस देता है|

साइफर(Cypher)- 

यह बिट बाई बिट या कैरेक्टर बाई कैरेक्टर को change करने की प्रक्रिया होती है| जिसमे किसी भी सूचना का अर्थ नही बदलता है|

साइफर टेक्स्ट(Cypher Text)-

यह कोड भाषा में लिखा होता है इस भाषा को यूजर सीधे सीधे नही पढ़ पता है|

Cryptography के और भी component है –

जैसे- Encryption, Decryption, Stenography, Integrity etc.

वायरस को तलाशना और उनको नष्ट करना-

आप सभी ने एक बात तो जरुर सुना होगा की लोहे को लोहे से ही कटा जा सकता है उसी प्रकार जब आपके computer में वायरस आ जाते है तो उस वायरस को नष्ट करने के लिए एक एंटीवायरस सॉफ्टवेयर प्रोग्राम को बनाया गया है जो एक तरह का अच्छा वाला वायरस प्रोग्राम है| 

आप अपने computer और नेटवर्क इन्टरनेट को पूरी तरह से सुरक्षित नही रख सकते है| आप कुछ सुरक्षा उपायों को अपनाकर अपने personal computer को वायरस से बचा सकते है|

Boot sector virus-

इस वायरस के खतरे से अपने computer को बचाने के लिए और उसके खतरे को कम करने के लिए Drive “A” के फ्लॉपी डिस्क को कभी open नही करना चाहिए जब तक आपको पूरी तरह से भरोसा न हो जाय की इस ड्राइव में वायरस नही है और सभी फ्लॉपी डिस्क में बूट सेक्टर शामिल होते है| आपका computer चालू होते समय ड्राइव “A” से क्रिया करता है जब यह काम सही से नही हो पाता है तो भी यह आपके computer के हार्ड डिस्क को नुकसानी हो सकती है|

मैक्रो वायरस (Macro Virus)-

मैक्रो वायरस से आप अपने computer को बचाने के लिए आप अपने सभी एप्लीकेशन में मैक्रो सेक्युरिटी लेबल को सेट कर सकते है जो आपको Micro लिखने की अनुमति देते है जब कोई भी Document आपको किसी भरोसेमंद व्यक्ति से मिला है तो आप Macro को इनेबल कर सकते है फिर इसके करने का प्रयास नही कर सकते है|

Virus के खतरे से अपने computer को बचाने के लिए आपको अपने computer में एक Antivirus program को install कर लेना चाहिए और antivirus को हमेशा update करते रहना चाहिए antivirus program हमारे computer की मेमोरी में स्टोरेज मीडिया की फाइल में मौजूद किसी भी वायरस को खोज कर उनको नष्ट कर देता है|

Antivirus program उस program को scan करते है जो बूट प्रोग्राम ऑपरेटिंग सिस्टम और दुसरे प्रोग्राम को मॉडिफाई करते है| तथा antivirus जादा से जादा उन फाइल्स को scan करते है जो internet से डाउनलोड किये जाते है| जैसे की ईमेल attachment से प्राप्त करते है और फाइल को open करते है| 

Antivirus program किसी भी वायरस को अपनी एक तकनीक से वायरस को खोज लेते है| वायरस सिग्नेचर को वायरस डेफिनिशन कहते है इस वायरस को स्पेसिफिक पैटर्न के नाम से भी जाना जाता है| आपको अपने antivirus program को अपडेट करना काफी जरुरी है जिससे सिग्नेचर वायरस नए खोजे गये वायरस की फाइल को नष्ट कर सके|

तो इस तरह से antivirus सॉफ्टवेयर प्रोग्राम आपके computer की वायरस से सुरक्षा करता है और कुछ antivirus program ऑटो अपडेट feature होते है जो अपने आप ही इन्टरनेट की मदद से अपडेट हो जाते है|

Conclusion

तो दोस्तों आप सभी को हमारी आज की पोस्ट Computer security आपको जरुर पसंद आई होगी आज की पोस्ट में हमारी पूरी कोशिस यही थी की हम आपको computer security के बारे में पूरी जानकारी दे| अगर आपके मन में कोई भी सवाल है या आप computer के बारे में किसी भी सवाल का जवाब जानना चाहते है तो आप निचे कमेंट बॉक्स में कमेंट कर सकते है हमारी पूरी टीम मिलकर आपके सवाल का जवाब देने की पूरी कोशिस करेगी|

                      धन्यवाद्….


Spread the love

6 thoughts on “कंप्यूटर सिक्यूरिटी – (Computer Security)”

  1. Magnificent beat ! I wish to apprentice whilst you amend
    your web site, how could i subscribe for a weblog website?
    The account helped me a appropriate deal. I have been a little bit acquainted of this your broadcast provided
    shiny transparent idea

  2. Hey there! This is my first visit to your blog!
    We are a collection of volunteers and starting a new initiative in a community in the same niche.
    Your blog provided us useful information to work on. You have done a marvellous job!

  3. Hello are using WordPress for your blog platform?

    I’m new to the blog world but I’m trying to get started and create my own. Do you require any coding knowledge to make your own blog?
    Any help would be greatly appreciated!

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *